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निर्यात का 200 अरब का लक्ष्य निर्धारित August 27, 2009

Filed under: current affairs,IN HINDI — swapsushias @ 3:07 pm

भारत सरकार ने गुरुवार को नई विदेश व्यापार नीति की घोषणा की. इसमें निर्यातकों के लिए अनेक सुविधाओं की घोषणा की गई है.

नई विदेश व्यापार नीति में 2009-10 के दौरान 200 अरब डालर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सबसे पहले निर्यात में आ रही गिरावट को रोकने की कोशिश की जाएगी.

उनका कहना था कि निर्यात में 15 फ़ीसदी वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. दो साल बाद इस नीति की समीक्षा की जाएगी.

उनका कहना था कि जुलाई महीने में औद्योगिक उत्पादन सात फ़ीसदी रहा.

वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि शुल्क वापसी योजना दिसंबर, 2010 तक जारी रहेगी.

उन्होंने बताया कि शत प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए आयकर छूट की अवधि एक साल के लिए और बढ़ाई गई है.

उल्लेखनीय है कि वैश्विक मंदी की वजह से भारतीय निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इसमें पिछले 10 महीने से गिरावट जारी है.

जून 2009 को समाप्त दूसरी तिमाही के दौरान निर्यात में 31 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज हुई.

वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान भारत का निर्यात 168 अरब डालर था, वाणिज्य मंत्री ने 2010-11 तक इसे 200 डालर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

 

Scam in power purchase : downside of privatisation August 23, 2009

Filed under: IN HINDI,National Affairs — swapsushias @ 12:38 pm

This is big now a days , not only in MP but in many states. Problem stems from various factors :

1. competitive electoral politics of giving 24 hour electricity at election time even if power plants are not producing enough forcing boards to make open market purchases at exorbitant rates.

2. A complete apathy by public representatives to working of electricity regulatory commission and fixing of tariff. In Indore none of MLA or MP even bothers to attend public hearing.

3. No new power projects in private or government sector except indira sagar in last 20 years.

4. Huge scale pilferage and non recovery of bills and politicians who are responsible for under investment in generation and transmission support all such elements here thus harming electricity board twice.

5. Absence of well developed power trading mechanism in country.

6. Our fetish for IAS officers. They man regulatory body, they run electricity board ( why not people having experience of running utilities, they do the trading on power exchange also , why not MBAs from IIM ? ) result an inefficient, incapable, unresponsive and costly utility.

Economic survey of this yea shows that MP has second highest tariff in India and which in part explains why big industries are so shy of our state.

भोपाल। बिजली खरीदी में अनियमितताओं की शिकायत पर लोकायुक्त ने तीन विद्युत वितरण कंपनियों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

लोकायुक्त जस्टिस पीपी नावलेकर ने नागरिक उपभोक्ता मंच द्वारा इस संबंध में की गई शिकायत की सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई आगामी सात सितंबर को भोपाल में निर्धारित की गई है। मंच द्वारा लोकायुक्त के समक्ष की गई शिकायत में कहा गया था कि वर्ष 2005 से वर्ष 2008 के बीच इन वितरण कंपनियों द्वारा 1770 करोड़ रुपए की अल्पकालीन बिजली खरीद में केवल नियमों की अनदेखी की गई, बल्कि भारी भ्रष्टाचार भी किया गया। शिकायत में कहा गया कि खरीदी गई बिजली में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया, खरीदी के लिए नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली गई तथा बिना निविदा के महंगी दर पर बिजली खरीदी गई। लोकायुक्त ने नोटिस जारी कर तीनों कंपनियों से जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर को भोपाल में होगी। उल्लेखनीय है कि विद्युत दरों से संबंधित टैरिफ की घोषणा के समय पत्रकारों ने नियामक आयोग के अध्यक्ष से भी बिजली खरीदी को लेकर सवाल किया था। उन्होंने बताया था कि 2006-07 में खरीदी गई बिजली में अनियमितता पाए जाने पर आयोग ने 1100 करोड़ से अधिक की स्वीकृति नहीं दी थी।

उनका कहना था कि चालू साल में खरीदी का ब्योरा अभी नियामक आयोग के सामने नहीं आया, यह मामला जब उनके सामने आएगा तो देखेंगे। दरअसल बिजली खरीदी को लेकर सरकार पर विधानसभा चुनावों के बाद से ही आरोप लग रहे हैं। शिकायत है कि चुनावों के मद्देनजर मतदाता नाराज हों, इसलिए उस समय तो महंगी बिजली खरीदी गई, लेकिन उसके बाद नहीं। इसकी वजह से बिजली संकट बरकरार है। सामान्य तौर पर भी बिजली खरीदी को लेकर अनियमितताओं की शिकायत है।

 

विश्व नक्शे में आएगा भेड़ाघाट August 23, 2009

Filed under: current affairs,IN HINDI,INDIA K RANG,JARA HATKE — swapsushias @ 6:10 am



जबलपुर.
भेड़ाघाट को यूनाईटेड नेशन्स साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाईजेशन (यूनेस्को) से वल्र्डनेचुरल हेरिटेज साईट घोषित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं , इसके लिए भारत सरकार के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह जानकारी सम्भागायुक्त प्रभात पाराशर की अध्यक्षता में आयोजित हुई इंटैक की बैठक के दौरान दी गई।

बैठक में इंटैक के संयोजक आरके शर्मा ने बताया कि यूनेस्को की प्रस्तावित सूची में भेड़ाघाट और चौंसठ योगिनी मंदिर यदि शामिल कर लिए जाते हैं तो इस क्षेत्र के विकास के लिए यूनेस्को द्वारा पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया जा सकता है। बठक में इंटैक जबलपुर की ओर से अध्यक्ष संभागायुक्तश्री पाराशर का स्वागत कर उन्हें मोनो दिया गया।

इंटैक में शामिल नए सदस्यों का परिचय दिया गया तथा बैज लगाकर सदस्यता एवं केन्द्रीय कार्यालय से प्राप्त प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इंटैक जबलपुर में 51 सदस्य हैं। कलेक्टर हरिरंजन राव ने बताया कि मंदिर के आसपास तथा तेवर में कई स्थान ऐसे हैं जिसे पुरातत्व के संदर्भ में संरक्षित किया जा सकता है। कौन सा क्षेत्र संरक्षण के लिए चुना जाए, इसका सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

सदस्यों ने कहा कि पुरातत्व की दृष्टि से यह क्षेत्र बहुत ही महत्वपूर्ण है। सर्वेक्षण के लिए जरूरी राशि आवंटित कराने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि त्रिपुर सुंदरी मंदिर एवं संलग्न भू-खंड की ऐतिहासिक महत्ता अक्षुण्य बनाए रखने के लिए यहां सभी प्रकार के निर्माण एवं उत्खनन कार्य को प्रतिबन्धित करने की सूचना देने एक नोटिस बोर्ड वहां स्थापित किया जा चुका है। बठक में आय-व्यय का लेखा भी प्रस्तुत किया गया है, जिसे मान्य करते हुए सर्वसम्मति से पारित किया गया है।

 

एशिया में खाद्यान्न संकट की चेतावनी August 22, 2009

Filed under: Global Issue,IN HINDI,INTERNATIONAL — swapsushias @ 12:57 pm

वैज्ञानिकों ने एशियाई देशों को चेतावनी दी है कि यदि वे तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और पानी की कमी कीसमस्या से नहीं निबटते हैं तो उन्हें खाद्यान्न के भारी संकट और सामाजिक असंतोष का सामना करनापड़ सकता है.

<img style="width: 455px; height: 194px;" src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/assets/images/2009/01/090109mountains226.jpg" alt="नदी”>

पानी के संकट को लेकर पहले भी चेतावनी दी जाती रही है

स्वीडन में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में जल विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण और पूर्व एशियाई देशों को खाद्यान्न की माँग को पूरा करना है और आयात पर निर्भरता को कम करना है तो उन्हें सिंचाई प्रणाली में सुधार करना होगा और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च करने होंगे.

माना जा रहा है कि इन देशों में वर्ष 2050 तक खाद्यान्न की माँग दोगुनी हो जाएगी.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस भविष्यवाणी में जलवायु परिवर्तन के असर का आकलन नहीं किया गया है.

खाद्यान्न की मांग पूर्ति के लिए सिर्फ़ बाज़ार पर भरोसा करने से विकासशील देशों पर अतर्कसंगत दबाव पड़ेगा

संकट

ऐसा आकलन है कि एशिया की जनसंख्या अगले 40 वर्षों में डेढ़ अरब बढ़ जाएगी.

ये आकलन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान की संयुक्त रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है.

विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई देशों को अपनी जनता को खाद्यान्य उपलब्ध करवाने के लिए एक चौथाई अनाज आयात करना पड़ेगा.

इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट ने महानिदेशक कॉलिन चार्टेस का कहना है, “खाद्यान्न की मांग पूर्ति के लिए सिर्फ़ बाज़ार पर भरोसा करने से विकासशील देशों पर अतर्कसंगत दबाव पड़ेगा.”

उनका कहना है कि जब नई कृषि भूमि तैयार नहीं हो रही है तो ऐसे समय में समाधान यही होगा कि सिंचाई के साधनों को सुधारा जाए, जो 1970 और 80 के दशक की तकनीक पर काम कर रहे हैं.

लेकिन उनका कहना है कि इसमें अरबों डॉलर रुपयों की ज़रुरत होगी.

 

श्रीलंका: विस्थापितों के हालात ‘भयंकर’ August 22, 2009

Filed under: current affairs,ESSAY,IN HINDI,INTERNATIONAL,TERRORISM — swapsushias @ 12:52 pm

विस्थापित तमिल नागरिक

अंतिम युद्ध में लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.

श्रीलंका के एक वरिष्ठ तमिल नेता ने सरकार से विस्थापित नागरिकों को जल्दी से जल्दी उनके घरों तक वापस पहुँचाने और बसाने की अपील की है.

वी आनंदसांगरी ने शिविरों में रह रहे और युद्ध में बेघर हो चुके नागरिकों की स्थिति को अत्यंत भयानक बताया है.

तमिल यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट के प्रमुख ने कहा कि लाखों लोग मुश्किल और ग़रीबी का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उत्तरी श्रीलंका में तमिल नागरिकों के लिए बने शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य और सफ़ाई की समस्याएँ हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पिछले दिनों सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच हुए संघर्ष में क़रीब तीन लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

नागरिकों को विभिन्न शिविरों में रखा गया है जिनमें से ज़्यादातर उत्तरी शहर वावूनिवा के पास मेनिक फ़ार्म में स्थित हैं.

मेनिक फ़ार्म शिविरों को संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन शिविर बताया है. यहाँ युद्ध में विस्थापित हुए क़रीब दो लाख बीस हज़ार लोगों को रखा गया है.

स्वास्थ्य चिंताएं

यूएलएफ़ के नेता वी आनंदसांगरी श्रीलंका के कुछ उदारवादी तमिल राजनेताओं में से एक हैं. उन्होंने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ उठाए गए सरकार के रुख़ का भरपूर समर्थन किया था.

नागरिकों ने तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके से भागते वक्त अपनी जान दाँव पर लगा दी क्योंकि विद्रोही उन पर गोलियाँ बरसा रहे थे. अगर सरकार को ऐसे लोगों पर तमिल विद्रोही होने का शक़ है तो दो ज़िलों- किलिनोच्ची और मुल्लेतिवू की सारी जनसंख्या ही तमिल विद्रोही होनी चाहिए

आनंदसांगरी ने बीबीसी से कहा, “शिविरों में रह रहे लोगों से मिली सूचनाओं के अनुसार कुछ क्षेत्रों की हालत अच्छी है जबकि बहुत सी जगहों की हालत भयानक है.”

उनके अनुसार, “शिविरों में स्वास्थ्य, पानी और सफ़ाई की स्थिति भयानक है. पानी की कमी की वजह से बहुत से लोग कई-कई दिनों तक नहा नहीं पाते हैं. इससे बहुत से लोगों को त्वचा संबंधी बीमारियाँ हो गई हैं.”

उन्होंने कहा, “गर्भवती महिलाएँ और नवजात शिशु शिविरों में तपती गर्मी की वजह से भयानक स्थितियों से गुज़र रहे हैं.”

श्रीलंका की सरकार ने माना है कि कुछ शिविरों की हालत आदर्श नहीं है लेकिन कहा कि दूसरे अनेक शिविरों में सुविधाओं में सुधार किया गया है.

सरकार का कहना है कि पूरी तरह से भरे हुए शिविरों से भीड़ कम करने और नए शिविर बनाने के लिए कुछ ज़मीन भी आवंटित की गई है.

संयुक्त राष्ट्र और दूसरे सहायता संगठन भी मानवीय कार्यों को संपन्न कराने के लिए शिविरों तक बेहतर पहुँच की माँग कर रहे हैं.

पुनर्वास की योजना

श्रीलंका सरकार सहायता संगठनों को लेकर कुछ आशंकित है और उसने शिकायत की है कि इन संगठनों ने बीते दिनों में तमिल विद्रोहियों की मदद की है.

श्रीलंका का कहना है कि उनकी योजना छह महीनों के भीतर ज़्यादातर शरणार्थियों का पुनर्वास कराने की है.

तमिल विद्रोहियों के जाने-माने आलोचक आनंदसांगरी ने शिविर के हर तमिल नागरिक को संभावित तमिल विद्रोही की तरह देखने पर भी सरकार की खिंचाई की है.

श्रीलंका ने कहा है कि उन्हें शिविरों में छिपे प्रमुख तमिल विद्रोहियों को खोज निकालने के लिए समय की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “नागरिकों ने तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके से भागते वक्त अपनी जान दाँव पर लगा दी क्योंकि विद्रोही उन पर गोलियाँ बरसा रहे थे.

अगर सरकार को ऐसे लोगों पर तमिल विद्रोही होने का शक़ है तो दो ज़िलों- किलिनोच्ची और मुल्लेतिवू की सारी जनसंख्या ही तमिल विद्रोही होनी चाहिए.”

श्रीलंका के अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें तो विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले स्थान से आए लाखों-नागरिकों के अचानक आगमन पर ख़ुश होना चाहिए.

सरकार ने कहा कि उसे युद्ध के बाद पुनर्वास के काम के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद की भी ज़रूरत है.

टीयूएलएफ़ नेता ने कहा कि श्रीलंका के सुरक्षा बल विस्थापित नागरिकों के लिए अच्छा राहत कार्य कर रहे हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह पर्याप्त नहीं है.

उन्होंने कहा, “विस्थापित नागरिकों की संख्या की वजह से सरकार अपने बल पर यह समस्या नहीं सुलझा सकती.”

 

भारत-नेपाल नई संधि पर सहमत August 22, 2009

Filed under: IN HINDI,INTERNATIONAL,International Relation — swapsushias @ 12:36 pm
<img src="http://www.bbc.co.uk/worldservice/assets/images/2009/08/22/090822105311_manmohan_nepal_226.jpg" alt="मनमोहन-माधव नेपाल” width=”226″ height=”170″>

भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच अवैध व्यापार पर रोक लगाने पर सहमत हो गए हैं.

इस पर दोनों देशों के बीच समझौता भी होगा जिस पर बाद में हस्ताक्षर किए जाएंगे. इसके तहत ख़ास तौर पर तीसरे देश के रास्ते अवैध तरीके से होने वाले व्यापार को रोकने की कोशिश की जाएगी.

दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार संधि पर भी हस्ताक्षर करेंगे जिस पर पिछले दो वर्षों से बातचीत चल रही है. इसक मकसद द्विपक्षीय कारोबार का दायरा बढ़ाना है.

भारत नेपाल में निर्मित वस्तुओं को भारतीय बाज़ार में शुल्क मुक्त प्रवेश देने पर राजी हो गया है.

दोनों देशों के बीच बनी सहमति के दस्तावेज़ पर भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर और नेपाल के वाणिज्य सचिव पुरुषोत्तम ओझा ने दस्तख़त किए.

इस मौके पर भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और नेपाल के वाणिज्य मंत्री राजेंद्र महतो उपस्थित थे.

नए समझौते से 1991 में हुआ समझौता अप्रभावी हो जाएगा.

साझा बयान

इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने साझा प्रेस बयान जारी किया है जिसमें दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता जताई है.

इस बात पर सहमति बनी है कि सुरक्षा पर द्विपक्षीय सलाहकार समूह और दोनों देशों के गृह सचिव दो महीने के भीतर बैठक करेंगे. इसमें सीमा पर अपराध समेत सुरक्षा के सभी मुद्दों पर चर्चा होगी.

नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल का छह दिवसीय भारत दौरा शनिवार को ख़त्म हो रहा है.

साझा बयान के मुताबिक नेपाल ने वादा किया है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ नहीं होने देगा और भारत ने भी ऐसा ही आश्वासन पड़ोसी देश को दिया है.

इसमें कहा गया है, “इस बात पर सहमति बनी है कि सुरक्षा पर द्विपक्षीय सलाहकार समूह और दोनों देशों के गृह सचिव दो महीने के भीतर बैठक करेंगे. इसमें सीमा पर अपराध समेत सुरक्षा के सभी मुद्दों पर चर्चा होगी.”

दोनों देशों के प्रधानमंत्री 1950 की मैत्री संधि की समीक्षा करने पर सहमत हो गए हैं.

 

किस मोड़ पर है भारतीय अर्थव्यवस्था? August 22, 2009

Filed under: current affairs,ESSAY,IN HINDI,indian economy — swapsushias @ 12:16 pm

किस मोड़ पर है भारतीय अर्थव्यवस्था?


वर्ष 2006 के मार्च महीने में ब्रिटेन का आम बजट पेश किया गया. बजट में ब्रितानी वित्त मंत्री के भाषण का एक मुख्य अंश कुछ यूँ था.
भारत और चीन से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि हम हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठे रह सकते

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने अपने अहम राष्ट्रीय भाषण में कुछ ये कहा,
हम हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठ सकते. दुनिया की अर्थव्यवस्था में हम भारत और चीन जैसे नए प्रतियोगी देख रहे हैं.”

विभिन्न क्षेत्रों में विकास दर

दो बड़े और विकसित देश और दोनों की टिप्पणियों में एक सी बात-चीन और भारत जैसी उभरती आर्थिक महाशक्तियों का मुकाबला करना होगा.
आख़िर क्यों छाया हुआ है भारत का हौवा पूरी दुनिया में. जवाब जानने के लिए नज़र डालते हैं कुछ आँकड़ों पर. इस साल पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में वर्ष 2005-06 में भारत में 8.1 प्रतिशत विकास दर की बात कही गई थी.
वहीं भारतीय रिज़र्व बैंक ने अप्रैल में अपनी वार्षिक नीति पर जारी बयान में भारत में वर्ष 2006-07 में विकास दर 7.5-8.0 फ़ीसदी के बीच रहने की उम्मीद जताई है.
भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पवन कुमार बंसल कहते हैं, “भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत अच्छे मोड़ पर है इस वक़्त हमें तो उम्मीद है कि आने वाले सालों में विकास दर और बढ़ेगी.”
पिछले दो सालों में भारत में 8.5 और 7.5 फ़ीसदी की दर से विकास होता रहा है.
बेहतर स्थिति
विकास दर के अलावा अगर आर्थिक प्रगति के दूसरे मापदंडों की बात करें तो भी भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी बेहतर स्थिति में नज़र आ रही है.
सकारात्मक पहलू
विकास दर में बढ़ोत्तरी
बढ़ता विदेशी निवेश
औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में विकास
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि
सेंसेक्स में लगातार उछाल
मुद्रा स्फ़ीति काबू में
24 मार्च को ख़त्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार करीब 148.662 अरब डॉलर तक पहुँच गया. कभी विदेशी संस्थानों से कर्ज़ लेने वाले भारत ने वर्ष 2003 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को कर्ज़ देने की घोषणा की.
वर्ष 2005 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 33.8 फ़ीसदी की वृद्धि हुई.
ये तो हुई सरकारी आँकड़ों की बात. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने भी एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि अगले दो सालों तक भारत में आठ फ़ीसदी की दर से विकास होता रहेगा, औद्योगिक क्षेत्र में आठ तो सेवा क्षेत्र में 8.5 प्रतिशत की विकास दर रहेगी.
भारत की गिनती अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है. विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत बड़ा खिलाड़ी बनता जा रहा है. आईटी सेक्टर में पूरी दुनिया भारत का लोहा मानती है.
औद्योगिक-सेवा क्षेत्र में विकास
भारत आउटसोर्सिंग का बड़ा बाज़ार उभर कर सामने आया है
सवाल ये है कि आख़िर विकास रूपी गाड़ी के वो कौन से इंजन हैं जिनके चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की गाड़ी सरपट दौड़े जा रही है.
भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे ज़्यादा विकास हुआ है उद्योग और सेवा क्षेत्र में. वर्ष 2002-03 में दसवीं पंच वर्षीय योजना शुरू होने के बाद से इन दोनों क्षेत्रों में सालाना 7 फ़ीसदी या उससे ज़्यादा की दर से विकास हुआ है.
उद्योगो में मैन्यूफैक्चिरिंग, खनन और बिजली क्षेत्र अग्रणी रहे हैं. जबकि सेवा क्षेत्र की बात करें तो इसमें मोटे तौर पर तीन क्षेत्र आगे हैं- बैंकिंग, बीमा और रीयल ऐस्टेट जिनमें 9.5 फ़ीसदी के दर से विकास हुआ है.
फ़ोर्ब्स पत्रिका की मानें तो दुनिया के कुल अरबपतियों की सूची में भारत के 23 अरबपति शामिल हैं.
दूसरा पहलू
कृषि में विकास दर उद्योग और सेवा क्षेत्र के मुकाबले कहीं पीछे है
कुल मिला कर कहें तो बहुत ही सकारात्मक, उज्जवल और चमकती दमकती तस्वीर उभर कर सामने आ रही है मौजूदा भारतीय अर्थव्यवस्था की.
लेकिन तस्वीर का एक पहलू और भी है जो आँकड़ो की चमक दमक को कुछ हदतक तो फ़ीका कर देता है.
पारंपरिक तौर पर कृषि प्रधान कहे जाने वाले भारतवर्ष में 2005-06 में कृषि की विकास दर केवल 2.3 फ़ीसदी रहने की बात कही गई थी.2002-03 में तो हालत इतनी बदतर हो गई थी कि ये शून्य से भी नीचे चली गई थी(-6.9 फ़ीसदी)
ये स्थिति तब है जब आज भी भारत की करीब 65 से 70 फ़ीसदी जनसंख्या रोज़गार के लिए कृषि या कृषि आधारित कामों पर निर्भर करती है.
आधारभूत ढाँचा-रोज़गार?
खराब सड़कें और आधारभूत ढाँचे की कमी निवेशकों को दूर भगा सकती है
भारत में कई जगहों में अब भी सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत ज़रूरतों की कमी है और ये तस्वीर सिर्फ़ गाँवों की ही नहीं- बंगलौर जैसे शहरों की भी है.
इन मूलभूत ज़रूरतों के अभाव में उद्योग और सेवा सेक्टर में जारी विकास इतनी ही गति से बरकरार रह पाएगा ये भी एक बड़ा सवाल है.
क्रेडिट एजेंसी क्रिसिल के निदेशक डीके जोशी भारत के आर्थिक विकास से खुश तो हैं लेकिन आधारभूत ढाँचे और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं को चिंता का विषय मानते हैं.
रोज़गार के अवसरों की बात करें तो भारत में इस समय करीब तीन करोड़ साठलाख बेरोज़गार युवा है.
कहने को भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन मानव विकास सूचकाँक में भारत का नंबर है 127. पिछले साल आई संयुक्त राष्ट्र की विकास रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में हो रहे विकास का फ़ायदा ग़रीबों तक नहीं पहुँच पा रहा है.
राह किधर?
तेल की आसमान छूती कीमतें और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला दूरगामी असर भी चिंता का विषय है. अनुमान के मुताबिक मौजूदा 25 लाख बैरल प्रति दिन तेल की खपत के मुकाबले, 2010 तक भारत को 31 लाख बैरल तेल प्रति दिन चाहिए होगा.
भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल आयात का 30 प्रतिशत हिस्सा तेल का होता है.
एक ओर होंगे सेवा क्षेत्र और विदेशी निवेश जैसे पहलू जहाँ माहौल सकारात्मक है. दूसरी तरफ़ है मध्यम वर्ग की अर्थव्यवस्था जिमसें अपार संभावनाएँ हैं लेकिन कई तरह की परेशानियाँ भी हैं और तीसरे स्तर पर है एक ऐसा वर्ग जिसका ऊपर के दो वर्गों से कोई लेना देना नहीं है, उनकी समस्याएँ शायद वैसी की वैसी रहने वाली हैं.
आलोक पुराणिक, विशेषज्ञ
चीन से तुलना करें तो विदेशी निवेश, आधारभूत ढाँचे और विकास दर- हर मायने में चीन भारत से आगे है.
भारतीय अर्थव्यवस्था और उसकी दो विपरीत तस्वीरें. आख़िर क्या है वास्तविकता.
आर्थिक मामलों के जानकार आलोक पुराणिक के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की मिश्रित तस्वीर उभर कर सामने आ रही है.
उनका कहना है, “आने वाले सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था का तीन स्तरों पर वर्गीकरण हो जाएगा, एक ओर होंगे सर्विसिज़ सेक्टर, विदेशी निवेश और सेंसेक्स जैसे पहलू जहाँ माहौल काफ़ी सकारात्मक है. दूसरी तरफ़ है मध्यम वर्ग की अर्थव्यवस्था जिमसें अपार संभनाएँ दिखाई पड़ती हैं लेकिन कई तरह की परेशानियाँ भी हैं और तीसरे स्तर पर है एक ऐसा वर्ग जिसका ऊपर के दो वर्गों से कोई लेना देना नहीं है, उनकी समस्याएँ शायद वैसी की वैसी रहने वाली हैं और शायद बढ़ने वाली हैं.”
औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में विकास की बदौलत भारत में विकास की गाड़ी तेज़ी से दौड़ तो रही है लेकिन अभी भी उसके सामने कई तरह की चुनौतियाँ हैं.

लिहाज़ा फ़र्राटे से दौड़ रहे विकास के घोड़े को अगर लंबे रेस का घोड़ा बनना है तो आधारभूत ढाँचे, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत ज़रूरतों की सही खुराक सही समय पर इसे देते रहना होगा.

 

तालेबान का प्रभाव-नक्शे में August 22, 2009

Filed under: ESSAY,IN HINDI,INTERNATIONAL,TERRORISM — swapsushias @ 12:10 pm

पाक-अफ़ग़ान सीमा पर अमरीका ने तालेबान समेत चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है. मुख्य संघर्ष क्षेत्र नक्शे में दिखाए गए हैं
इस्लामिक चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा को नई फ़्रंटलाइन घोषित किया है. कुछ इलाक़ें है जिन्हें चरमपंथियों ने अपना गढ़ बना लिया है. सेना और चरमपंथियों के बीच लगातार वहाँ संघर्ष होता रहता है. प्रमुख इलाक़ों पर नज़र


हेलमंद, चाघई

हेलमंद प्रांत के दक्षिणी मैदानी इलाक़ों में अफ़ग़ानिस्तान सरकार का दबदबा कम ही रहा है. ये तालेबान का मुख्य गढ़ बनकर उभरा है. कुछ दूर पाकिस्तान सीमा पर ब्लूचीस्तान का दूरगामी नोशकी-चाघई इलाक़ा है.
अफ़ग़ान सीमा के पास बारामचा से तालेबान चरमपंथी गतिविधियाँ नियंत्रित करता है. हेलमंद में ब्रितानी सैनिकों का अड्डा है और अतिरिक्त अमरीकी सैनिकों को भी यहाँ तैनात किया गया है.

कंधार, क्वेटा

कंधार को तालेबानी लहर का आध्यात्मिक गढ़ माना जाता है. तालेबान नेता मुल्ला उमर ने इसे मुख्यालय बनाया था जब 1996 में तालेबान सत्ता में आई थी. लादेन समेत अल क़ायदा के नेता भी इसी जगह को तरजीह देते थे.
इसलिए कंधार पर क़ब्ज़ा प्रतिष्ठा का सवाल रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में सबसे पहले आत्मघाती हमले कंधार में 2005-06 में हुए थे. हामिद करज़ई पर भी यहाँ हमला हो चुका है
अफ़ग़ान सरकार इस बात में सफल रही है कि उसने कंधार के किसी अहम हिस्से पर तालेबान का क़ब्ज़ा नहीं होने दिया. गठबंधन सेना के भी यहाँ अड्डे हैं. लेकिन ग्रामीण इलाक़ों में तालेबान का दबदबा है ख़ासकर पाक सीमा के पास.
अधिकारियों का कहना है कि कंधार सीमा के पास और पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा का इस्तेमाल तालेबान छिपने के लिए करता आया है. कुछ लोग मानते हैं मुल्ला उमर कंधार या हेलमंद में छिपे हैं.

स्वात


उत्तर पाकिस्तान में बसी स्वात घाटी में लंबे समय तक ब्रितानी समय की क़ानून व्यवस्था लागू थी लेकिन 90 के दशक में एक अदालत ने इसे ग़ैर क़ानूनी करार दे दिया था.इसके बाद स्वात में इस्लामिक क़ानून लागू करने के लिए स्वात और मालाखंड में हिंसक अभियान शुरु हो गया.
हालांकि 1994 में इस हिंसा का ख़ात्मा कर दिया गया था लेकिन 9/11 हमलों के बाद ये अभियान फिर शुरु हो गया. और इसमें वज़ीरिस्तान, बाजौड़ और दीर ज़िले के चरमपंथी भी शामिल हो गए.
अप्रैल 2009 में सरकार और स्थानीय तालेबान के बीच समझौते के तहत स्वात में शरिया क़ानून लागू हो गया लेकिन समझौते के मुताबिक चरमपंथियों ने हथियार नहीं डाले. चरमपंथियों ने इसी दौरान अपनी पहुँच बुनेर तक बना ली यानी इस्लामाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर. अफ़गान सीमा से सेट दीर ज़िले में चरमपंथियों की मौजूदगी भी अंतरराष्ट्रीय सेना के लिए ख़तरा बनी हुई थी.
स्वात से तालेबान का हटाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने 2009 में बड़ा अभियान चलाया. सेना का कहना है कि उसने बहुत सारे इलाक़ों से तालेबान को खदेड़ दिया है. स्वात के मिंगोरा शहर पर मई पर कब्ज़ा कर लिया गया था.

ज़ाबुल


ज़ाबुल कंधार के उत्तर में स्थित है और रिपोर्टों के मुताबिक चरमपंथी इस इलाक़े का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में करते हैं. वर्ष 2002 में तालेबान चरमपंथी अमरीकी अभियान के बाद भाग रहे थे तो वे ज़ाबुल के ज़रिए ही अफ़ग़ानिस्तान में दोबारा घुसे थे.
ज़ाबुल के ज़रिए अफ़गानिस्तान के ग़ज़नी, उरुज़गान और कंधार इलाक़ों तक पहुँच बनाई जा सकती है. इस इलाक़े में बहुत कम गठबंधन सेना के सैनिक मौजूद हैं. चरमपंथियों के कारण यहाँ के हाईवे पर अधिकारी या राहतकर्मी यात्रा नहीं करते.

कुर्रम, औरकज़ई, खाइबर


पाक-अफ़गान सीमा से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल (56 कीलोमीटर की दूरी) पर अभियान चलाने के लिए कुर्रम सबसे अच्छी जगह है. लेकिन ये शिया बहुल इलाक़ा है जो धार्मिक कारणों से तालेबान के विरोधी रहे हैं. इसलिए तालेबान यहाँ गढ़ नहीं बना पाया है.

दक्षिण वज़ीरिस्तान


पाकिस्तान के फ़ाटा का कबायली ज़िला दक्षिण वज़ीरिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के बाहर इस्लामिक चरमपंथियों का पहला गढ़ माना जाता है. तोरा-बोरा से निकाले गए चरमपंथियों ने 2001 के बाद यहीं शरण ले थी. दक्षिणी वज़ीरिस्तान के पूर्वी हिस्से में महसूद कबीले के लोग रहते हैं और मुख्य कमांडर बैतुल्ला महसूद रहे हैं. हालांकि वे ज़िंदा है या नहीं इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. वे पाकिस्तान में सबसे बड़े चरमपंथी संगठन के नेता माने जाते हैं. महसूद ने 2006 में तहरीक तालेबान पाकिस्तान संगठन बनाया था.

 

कोवेंट्री ने की सईद अनवर की बराबरी August 17, 2009

Filed under: CRICKET,current affairs,IN HINDI,SPORTS — swapsushias @ 5:51 am

बुलावायो. जिम्बाब्वे के मध्यक्रम के धुरंधर बल्लेबाज charles koventrii चाल्र्स कोवेंट्री ne 194 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाज सईद अनवर के सर्वाधिक रनों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली, पर उनकी यह पारी उनकी टीम को जिता न सकी और जिम्बाब्वे मैच के साथ-साथ सीरीज भी हार गया। बंगलादेश के तमीम इकबाल की शतकीय पारी उन पर भारी पड़ी और मेहमानों ने सीरीज पर 3-1 अजेय बढ़त हासिल कर ली।

 

QUIZ HO JAYE August 16, 2009

Filed under: GEOGRAPHY,IN HINDI,QUIZ — swapsushias @ 4:27 pm

1

मूक घाटी किस प्रदेश में है?
महाराष्ट्र
केरल
पंजाब
कश्मीर
2 ‘लेह पैलेस’ भारत के किस राज्य में स्थित है?
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
हिमाचल प्रदेश
राजस्थान

3 गोआ शहर किस नदी के किनारे स्थित है?
गंगा
मंडोवी
गोमती
साबरमती

4 जामनगर शहर किस राज्य में है?
गुजरात
राजस्थान
महाराष्ट्र
कर्नाटक

5 गीजा किस नदी के पश्चिमी तट पर है?
अमेजन
नील
ओरेंज
इनमें से कौन-सी जगह मुंबई में नहीं है?
दि गेटवे ऑफ इंडिया
दि कमला नेहरू पार्क
जुहू बीच
चारमीनार
7 विश्व की सबसे लंबी नहर किस भारतीय राज्य में है?
राजस्थान
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
असम

8 हिमालय में स्‍थित रोहतांग दर्रा किस नदी का उद्गम स्थल है?
चंबल
ब्यास
ताप्ती
नर्मदा

9 माउंट आबू किस पर्वत श्रृंखला में है?
अरावली
अन्नामलाई
नीलगिरी
शिवालिक

10 कौन-सी नदी जमशेदपुर से गुजरती है?
गोदावरी
लूनी
सुवर्णरेखा
कृष्णा
 

 
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